
हिल स्टेशन की खोज में सैलानी आम तौर पर मनाली, मसूरी, नैनीताल जैसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों पर ही जाते हैं...पर क्या आपने कभी लैंसडाउन का नाम सुना है?? अगर नहीं सुना तो कोई बात नहीं है क्योंकि ये कोई बहुत प्रसिद्ध हिल स्टेशन नहीं है और इसी वजह से ये जगह अभी तक भी प्राकृतिक सुंदरता से भरी हुई है।
लैंसडाउन वास्तव में उत्तराखंड का एक छिपा हुआ रत्न है और आज हम लैंसडाउन के पास एक ऐसी जगह के बारे में बात कर रहे हैं जहाँ का वातावरण इतना शांत है जो ध्यान करने, सुकून लेने और प्रकृति का सुंदरता को निहारने के लिए एक आदर्श स्थान है। जी हां हम बात कर रहे हैं ताड़केश्वर धाम की जो पौड़ी गढ़वाल में है और लैंसडाउन से करीब 35 किलोमीटर दूर है।
पहाड़ों में रोड ट्रिप की एक सबसे अच्छी बात ये होती है की आपको मंत्रमुग्ध कर देने वाले नजारे देखने को मिलते हैं...और इसी से भरपुर है लैंसडाउन से ताड़केश्वर महादेव मंदिर का एक खूबसूरत सफर.. तो चलिये आपको बताते हैं हमारे इस सफर के बारे में...
लैंसडाउन से ताड़केश्वर महादेव मंदिर


क़रीब एक घंटे की दूरी के रास्ते में लैंसडाउन से कुछ दूर निकले ही थे कि हमें कुछ अद्भुत दृश्य देखने को मिले ... हरियाली से भरी हुई पहाड़ियां...और बादलों का इस खूबसूरती को छूते हुए जाना... सच में ये एक बहुत अच्छा अहसास था... यहां के मौसम के बारे में सुनी हुई बात सच साबित हो रही थी और इन्ही मंत्रमुग्ध कर देने वाले नजारों के साथ कई बार हम बादलों के बीच से निकल रहे थे।

करीब एक घंटे के सफर के बाद हम ताड़केश्वर धाम के प्रवेश द्वार तक पहुचें जहां पार्किंग के लिए काफी जगह थी पार्किंग से मंदिर तक जाने के लिए 10-15 मिनट का आसान ट्रेक है जो कि घने देवदार के वृक्षों से घिरा हुआ है।
हम आपको बता दें कि ताड़केश्वर धाम का मंदिर आदिकालीन 1500 साल पुराना सिद्ध स्थान है।
ताड़केश्वर धाम प्रवेश द्वार


कुछ दूर ट्रेक पर आगे चलने के बाद से आपको इस जगह की खूबसुरती का एहसास हो जाएगा और साथ ही आपका मन शांति और सुकून से भर जाएगा कुछ देर बाद ही हमें मंदिर देखा जिसे देखने भर से ही हमें इस जगह की पवित्रता का एहसास हो गया था। चारों ओर केदार और देवदार के वृक्षों के बीच से बहती ताजा हवाएं आपको एक अलग ही सुख का एहसास कराती हैं।
करीब 1900 मीटर की ऊंचाई पर स्थित, ताड़केश्वर महादेव मंदिर को प्राचीन पवित्र स्थलों में से एक माना जाता है जिसे भगवान शिव को समर्पित सिद्ध पीठों के रूप में जाना जाता है। यह उत्तराखंड राज्य के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है।


मंदिर घंटियों से घिरा हुआ है और इस तथ्य को देखते हुए कि मंदिर ऊंचाई पर और जंगल के बीच में स्थित है, हर समय हल्की हवाएँ चलती हैं इसलिए घंटियाँ बजती हैं और शांत ध्वनि होती है ... यह सब न सिर्फ केवल कान और आंखों के लिए बल्कि दिमाग के लिए भी एक बेहद आनंद देने वाला एहसास था।
मंदिर के चारों ओर बस बहुत लम्बे-लम्बे केदार, देवदार के हज़ारों पेड़ और पक्षियों की मधुर आवाज़ के बीच जब आप कुछ समय बिताएंगे तो यक़ीन मानिये वहां से जाने का मन आपका बिलकुल नहीं करेगा...
यहां हमने महसूस किया कि सुकून पाने की इससे बेहतर जगह हो ही नहीं सकती।


यहाँ महाशिवरात्रि प्रतिवर्ष बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है, और भक्त बड़ी संख्या में यहां पूजा करने के लिए आते हैं। मंदिर हजारों घंटियों से घिरा हुआ है जो भक्तों द्वारा चढाई जाती है। मंदिर के पास पर्यटकों के ठहरने के लिए दो धर्मशालाएं भी हैं।
ताड़केश्वर महादेव की महिमा
ताड़केश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और इस मंदिर के पीछे एक रोमांचक कहानी है जिसे आप नीचे दिए गए फोटो में पढ़ सकते हैं।

त्रिशूल रूपी वृक्ष
मंदिर परिसर में मौजूद त्रिशूलनुमा देवदार का पेड़ है, जो दिखने में सचमुच बेहद अदभुत है।

अधिक जानकारी के लिए आप हमारे YouTube चैनल WE and IHANA पर जा सकते हैं
https://youtube.com/c/WEandIHANA
या फिर हमारा ताड़केश्वर महादेव का Vlog भी देख सकते हैं
ताड़केश्वर महादेव मंदिर कैसे पहुँचे:
सड़क मार्ग द्वारा: कोटद्वार कई शहरों से जुड़ा हुआ है। दिल्ली से कोटद्वार करीब 240 किमी है और कोटद्वार से लैंसडाउन करीब 40 किमी की दूरी पर है। लैंसडाउन से ताड़केश्वर महादेव मंदिर 37 किमी की दूरी पर है।
रेल मार्ग द्वारा: नजदीकी रेलवे स्टेशन कोटद्वार स्टेशन है। वहाँ से फिर टैक्सी या सरकारी बस आदि से ताड़केश्वर महादेव मंदिर पहुँचा जा सकता है।
हवाई मार्ग द्वारा: यहाँ का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा जौलीग्राँट एयरपोर्ट,देहरादून है जो लैंसडाउन से करीब 150 किमी की दूरी पर है।
क्या आपने इस जगह की यात्रा की है? अपने अनुभव को हमारे साथ शेयर करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
बांग्ला और गुजराती में सफ़रनामे पढ़ने और साझा करने के लिए Tripoto বাংলা और Tripoto ગુજરાતી फॉलो करें।
रोज़ाना टेलीग्राम पर यात्रा की प्रेरणा के लिए यहाँ क्लिक करें।