
भारत में कई ऐसी जगह हैं जिनका रहस्य आज भी बरकरार है। इन रहस्यमयी जगहों के बारे में सुनकर हर कोई हैरान रह जाता है। किसी किले से रहस्यमयी आवाजें आती हैं तो किसी मंदिर में माता दिन में अलग-अलग तीन रूप बदलती हैं। भारत में भगवान शिव का ऐसा मंदिर भी है जो दिन में दो बार पानी में डूब जाता है। इसके अलावा भी कई ऐसी जगह हैं जिनका रहस्य आज भी अबूझ पहेली बना हुआ है।
ऐसी ही एक जगह है सिंगौरगढ़ का किला। इस किले का रहस्य आज तक कोई जान नहीं पाया है। आज के आर्टिकल में हम आपको सिंगौरगढ़ के किले से जुड़े रहस्य के बारे में बताएंगे। इस किले के बारे में जानकर आप भी दांतों तले ऊंगलियां दबाने पर मजबूर हो जाएंगे।
मध्य प्रदेश में स्थित है सिंगौरगढ़ किला-

मध्य प्रदेश के दमोह में सिंगौरगढ़ का रहस्यमयी किला स्थित है। इसे गढ़ साम्राज्य का पहाड़ी किला माना जाता है। 1564 में रानी दुर्गावती के शासन काल में इस किले की काफी अहमियत थी। माना जाता है कि इस किले में रानी दुर्गावती का विवाह हुआ था। यह किला बेहद मजबूत और सुरक्षित था, जिसकी वजह से मुगल शासकों का इसे भेद पाना नामुमकिन था। इस किले की सुरक्षा दो चीजों पर टिकी थी, पहली इसके सामने पहाड़ दीवार बनकर खड़े थे। दूसरी इस किले के खुफियों रास्तों की जानकारी रानी और उनके सैनिकों के अलावा किसी को नहीं थी।
किले में है रहस्यमयी जलाशय-

सिंगौरगढ़ किले में एक जलाशय भी स्थित है। इसकी प्राकृतिक सुंदरता हर किसी का मन मोह लेती है। इस जलाशय की खासियत यह है कि इसमें कभी पानी खत्म नहीं होता है। माना जाता है कि इस तालाब में कई रहस्य छिपे हुए हैं। कहा जाता है कि इस रहस्यमयी तालाब में एक बावली बनी है, जहां सोने की मुद्राओं का खजाना छिपा है। इस जलाशय से लोगों ने सोने की मुद्राओं को निकालने के हजारों प्रयास करें लेकिन हर बार उनके हाथ असफलता ही लगी। अब ये बावली भू गर्भ में चली गई है।
धन निकालने का प्रयास पड़ता है भारी-

कहा जाता है कि जिस किसी ने सोने की मुद्राओं के लालच में यहां खुदाई की, उसके साथ बहुत बुरा हुआ। कई लोग बीमारी से मर गए तो कुछ लोग पागल हो गए। इस वजह से अब कोई इस रहस्यमयी जलाशय से धन निकालने की कोशिश नहीं करता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, सिंगौरगढ़ जलाशय में स्वर्ण मुद्राओं समेत रानी दुर्गावती का पारस का पत्थर भी डाल दिया गया था।
सिंगौरगढ़ से जबलपुर निकलती है सुरंग-

स्थानीय लोगों के मुताबिक, सिंगौरगढ़ किले से गुप्त सुरंग मदन महल जबलपुर निकलती है। हालांकि, इन सुरंगों को पुरातत्व विभाग ने बंद कर दिया है। यही नहीं, किले की सुरक्षा के लिए 32 किलोमीटर की दीवार बनी गई थी। जो आज भी सिंगौरगढ़ किले से पर्वत श्रृंखलाओं पर पूरी तरह सुरक्षित है।