यह बहुत ही इत्तेफाक की बात है के लॉकडाउन से पहले एडवेंचर टीम ऑफ आगरा का जो ट्रिप था वह राजस्थान का था, हम 15 मार्च 2020 को लौटे थे आगरा वापस। और एक बार फिर हम लोग निकल चुके हैं राजस्थान की ट्रिप पर लॉकडाउन के बाद।
चलिए अब की बार चलते हैं खुर्री।

और यहां पहुंचने के लिए हम लोगों ने थोड़ा डिफरेंट रूट पकड़ा था।
वैसे तो गूगल मैप्स के अनुसार हमें जयपुर से सीधा नागौर जाना चाहिए था पर हम जयपुर से अजमेर और फिर अजमेर से मेड़ता और मेड़ता से नागौर पहुंचे। ऐसा इस सोच में किया गया था कि शायद कुछ नई डिस्कवरी हो जाए, हालांकि ऐसा कुछ नहीं हुआ।
हाल ही में तो मॉनसून गुजरा था, तो राजस्थान काफी हरा-भरा दिखा हमें, इसकी एक्सपेक्टेशन मुझे बिल्कुल भी नहीं थी।
मेरा सहे दिल से आभार राजस्थान गवर्मेंट को और यहां के लोगों को, जो मिलकर इस रेगिस्तान को जन्नत बनाना चाहते हैं। हम सबको कुछ सीखना चाहिए इस स्टेट से।
हालांकि अब अगर आपको रेगिस्तान का मजा लेना हो तो जैसलमेर आना ही पड़ेगा।
हमारे हर विजय सर 70 साल के हैं, और इन्होंने कुर्री तक खुद ड्राइव किया 14 घंटे तक।
हम लोग 5:30 बजे पहुंचे खुर्री। हमने पहले से ही मामा रिसोर्ट बुक करा रखा था।अगर आप खुर्री आ रहे हैं अपनी कार से तो कार का पेट्रोल टैंक पूरा भरा होना चाहिए क्योंकि यहां कोई भी पेट्रोल पंप नहीं है।
हालांकि एक दुकान है यहां पर जो खुले में पेट्रोल बेचता है किसी भी स्थानीय बंधु से पूछ लीजिएगा उसका एड्रेस।

खूर्री के बारे में
खुर्री एक ऑफबीट लोकेशन है। अगर आपको रेगिस्तान से प्यार है आप काफी एडवेंचरस हैं और आप बिल्कुल अकेला रहना चाहते हैं कि दूर-दूर तक कोई कुत्ता भी नहीं दिखे,एम सॉरी दूर-दूर तक कोई ऊंट भी ना दिखे तो यह आपके लिए ही बनी है।
यह जगह सम सैंड ड्यून्स जैसी तो बिल्कुल भी नहीं है। सम सैंड ड्यून्स काफी कमर्शियलआईज हो चुका है। हालांकि आपको यहां के रिजॉर्ट्स और यहां की एक्टिविटीज वैसे ही मिलेंगी जैसे सम सैंड ड्यून्स में है।
Comparatively यह जगह बिल्कुल अलग-थलग है तो थोड़ी एक्सपेंसिव भी है|

मेरा अनुभव
चलिए अब मैं आपको बताता हूं कि हम लोगों ने यहां पर क्या-क्या किया। सवेरे सवेरे सबसे पहले हम लोगों ने यहां पर एक सफारी बुक करी जो हमें ले चली एक ऑफ रोड एक्सपीरियंस देने के लिए|
लगभग 30 मिनट की ताबड़तोड़ वाली राइड के बाद जिसे आप ड्यून बाशिंग भी कह सकते हैं हम लोग पहुंचे बहुत इंटीरियर वाले गांव में जिसका नाम था धनेली।

यहां के लोगों का बहुत ही साधारण सजीवन है। ज्यादातर यह लोग या तो चरवाहा है या कुछ की खेती बाड़ी है क्योंकि यहां पर पानी की बहुत कमी है। गोवर्धन जी जोकि बहुत उम्दा ड्राइवर हैं वह हमें इस गांव के सैंड ड्यून्स पर लेकर आए|
सवेरे का वक्त था था और यहां इस समय चरवाहे अपनी भेड़ बकरी गाय के साथ उन्हें यहीं से चरवाने निकलते हैं।
सच बताऊं तो मैं भौचक्का रह गया जब इस छोटी सी जगह पर फिर से एक तलाब देखा मैंने। भले ही यह लोग ज्यादा पढ़े लिखे न हो, पर यकीन मानिए इन सब के पास काफी बुद्धि है। पानी की एक बहुत बड़ी समस्या आने वाली है भविष्य में, हमें कुछ तो सीखना चाहिए इन लोगों से कि किस तरह से हम लोग भी बारिश के पानी को बचाएं।
यह तालाब इन्होंने पशुओं के लिए बनाया है। रोज सवेरे यह लोग इन्हें पानी पीलवा कर यहीं से आगे की ओर निकलते हैं।

मैं अब आपको बताता हूं यहां की भेड़ बकरियां खाती क्या है। इसे कहते हैं तुंबा, और इसकी यहां पर खूब खेती होती है। बकरियां ऐसे ही खाती हैं, और इसके बीज यहां के स्थानीय लोग बाजरे की रोटी के साथ मिलाकर खाते हैं

एक और चीज से मिल जाता हूं आपको जिसको मैं बचपन से देखता आया हूं नेशनल ज्योग्राफिक चैनल पर। मिलिए टाइगर बीटल से। स्थानीय लोग इसे गोगा कह कर बुलाते हैं। इसे मैंने गाय का गोबर ले जाते हुए देखा, शायद यह अपने बच्चे इसी में देगा। वैसे तो मुझे इससे कोई खासा डर नहीं लगा पर जैसे ही इसने अपने पंख फैलाए सच बताऊं तो मैं यूसेन बोल्ट बन चुका था।

थोड़ा और आगे जाने पर गोवर्धन जी ने हमें कुछ पत्थरों की कहानियां बताई। कुछ लोगों का मानना है कि यह पत्थर खुद ब खुद धरती से बाहर आ गए थे, और कुछ लोगों का मानना है कि यहां पर कोई बारात एकाएक गायब हो गई थी, या सब लोग मर गए थे, तो उनकी याद में यह पत्थर लगा दिए गए।
नजदीक जाकर मैंने जब देखा तो पाया पत्रों पर काफी कलाकृतियां बनी हुई है, तुम्हें वह बारात वाली कहानी पर विश्वास करूंगा। एक और बड़ी इंटरेस्टिंग बात बताता हूं आपको हम लोग राजस्थान में हैं और पार्टिकुलरली जैसलमेर के एरिया में है, तो यहां पर बारिश कम पड़ती है। इंद्र देव को प्रसन्न करने के लिए इन पत्थरों मैं से एक पर बकरी की आहुति दी जाती है, ताकि बारिश हो।

धनेली गांव में जब हमारी जीप खराब हुई तो हमें भी मौका मिला यहां के लोगों से और बच्चों से मिलने का। और इनके साथ बिताए हुए कुछ पल हम सबको हमेशा याद रहेंगे।

अगला पड़ाव जब तक पहुंचे तब तक सूर्य देव सर पर नाच रहे थे। और राजस्थान की गर्मी तो पूरे भारत में मशहूर है। तो हमारे गोवर्धन जी हम सब लोगों के लिए ले आ एक फल जो लगता है तरबूज की तरह पर है नहीं। इसका नाम है मतीरा। और इसे बारिशों में ही उगाया जाता है यहां। अगर आप यहां आए तो इसे टेस्ट जरूर करिएगा, यकीन मानिए आप लोग निराश नहीं होंगे।

अब आपको मिल पाता हूं एक शख्स से जो कि एक ऐसा संगीत का उपकरण बजाते हैं जिनकी गिनती अब उंगलियों पर की जा सकती है। हम लोग पहुंचे दाओ हमें और मिले हरदास राम जी से। और यह बजाते हैं अल-गुजा। अल का मतलब अल्लाह और गुजा का मतलब आवाज, मतलब अल्लाह की आवाज।

हरदास राम जी अपने बेटे को भी यह कला सिखा रहे हैं ताकि कुछ और पुषतो तक यह राग चलते रहे।इन से इजाजत लेने के बाद हम लोग थोड़ा रेस्ट और लंच करने के लिए वापस अपने रिजॉर्ट निकल पड़े| बीच में हम लोगों ने कुछ ऐसे सैंड ड्यून्स भी देखें जो शायद आज तक किसी भी टूरिस्ट ने नहीं देखे होंगे यह पढ़ते हैं दओ गांव में।

शाम को हम लोग दोबारा निकले और अब की बारी हमारे पास के ड्यून्स देखने की मतलब टूरिस्ट वाले सैंड ड्यून्स देखने की| मुझे यकीन ही नहीं हुआ कुछ पलों के लिए और बाद में याद आया कि Corona pandemic की वजह से यहां भी बिल्कुल भीड़ नहीं थी।और यह ड्यून्स भी बिल्कुल अनछुए थे। गोवर्धन जी ने बताया कि पिछले साल इस जगह पर पैर रखने की जगह नहीं थी।
यहां आप ऊंट की सवारी कर सकते हैं पर हम जब गए थे तो यहां कुछ भी नहीं था। शायद सर्दियों में जैसे ही टूरिज्म दोबारा एक्टिव हो यहां फिर से सब के लिए बाहर आ जाए। क्योंकि अब यहां ज्यादातर लोग टूरिज्म पर डिपेंडेंट हो चुके हैं। बताया गया है मुझे कि आप यहां के ड्यून्स पर रात भी बीता सकते हैं। पर हमारा प्लान कुछ और ही था।

हम लोग फिर निकल पड़े कुछ इंटीरियर के गांव में, और रात में हम लोगों ने देखी हमारी आकाशगंगा, बेहद खूबसूरत नजारा था वह।

यहां कहां रुके
हम लोग यहां ठहरे थे मामा रिसोर्ट में| बेहद सुंदर और प्यार से बनाया गया है यह रिजॉर्ट, आप यहां पर रूम्स या टेंट बुक करा सकते हैं। यहां की खाने की तारीफ जितनी करी जाए उतनी कम है। यह रिसोर्ट बिल्कुल खुली गांव ऑन रोड पर है, और पुलिस स्टेशन से भी काफी नजदीक है।

यहां सही आने का समय
यहां सही आने का समय है नवंबर से मार्च के बीच में
यहां कैसे पहुंचे
नजदीकी एयरपोर्ट रेलवे स्टेशन बस अड्डा सब जैसलमेर में है आपको यहां आने में जरा भी दिक्कत नहीं होगी
आशा करता हूं कि यह blog आपको पसंद आया होगा। फिर आऊंगा एक नई डेस्टिनेशन के साथ।तब तक के लिए इजाजत चाहता हूं| ईश्वर आपको खुश रखे स्वस्थ रखे।