
On In Tagged Andman, Havelock Island, hindi, हिंदी Port Blair, Radhanagar Beach, अंडमान, पोर्ट ब्लेयर, राधानगर तट, हेवलॉक द्वीप
नील द्वीप पर एक दिन का पैदल भ्रमण करने के बाद अगला पड़ाव था- पूरे अंडमान-निकोबार का सर्वाधिक प्रसिद्द द्वीप- हेवलॉक। अंडमान में कुल 572 द्वीप हैं, जिनमें सिर्फ 38 पर ही मनुष्य का प्रवास है। अब इन 38 में से पर्यटन के लिए हेवलॉक को ही सर्वाधिक जाना जाता है, विदेशी भी सबसे अधिक यहीं देखे जाते हैं। वैसे सुंदरता के मामले में अन्य कई द्वीप हेवलॉक को टक्कर देते हुए मालूम पड़ते हैं, यह हर किसी का अपना अनुभव हो सकता है, पर अंतर्राष्ट्रीय रूप से ख्याति अगर किसी को मिली है तो वो है -हेवलॉक।

हेवलॉक: राधानगर तट
***अंडमान के अन्य पोस्ट***
शुरुआत अंडमान यात्रा की... ( Trip to Andman: Jamshedpur-Kolkata to Port Blair) अंडमान यात्रा: सेल्युलर जेल (Trip to Andman: Cellular Jail) अंडमान यात्रा: लकड़ियों की जादूगरी- चाथम आरा मील और कोर्बिन तट (Chatham Saw Mill and Corbyn's Cove Beach- Port Blair) अंडमान यात्रा: नार्थ बे तट और भूतपूर्व पेरिस ऑफ़ ईस्ट- रॉस द्वीप (North Bay and Ross Island, Port Blair) अंडमान यात्रा: नील द्वीप पर पैदल भ्रमण- एक नीला एहसास (Neil Island- A Blue Heaven) नील से हेवलॉक- रंग-बिरंगा राधानगर तट (Neil to Havelock- The Colourful Radhanagar Beach) अंडमान ट्रंक रोड: समंदर से गुजरने वाले हाईवे पर सफर-पोर्ट ब्लेयर से डिगलीपुर (Andman Trunk Road: Highway which crosses the sea-Port Blair to Diglipur) रॉस एंड स्मिथ- जुड़वाँ टापू पर दो समुद्र तटों का मिलन (Ross and Smith Twin Island- Meeting of two sea beaches) अंडमान का कार्यक्रम कैसे बनायें? (How to plan Andman Trip) चिड़ियाटापू और मुंडा पहाड़ तट: समंदर में पहाड़ों पर सूर्यास्त! (Chidiyatapu and Munda Pahad Beach: Sunset in the hilly ocean) वंडूर तट और दुनिया के सबसे अच्छे कोरल रीफ वाला जॉली बॉय द्वीप (Wondoor Beach and Jolly Bouy Island: One of the best Coral Reefs of the World) रंगत की काली रात और सुबह बाराटांग में चूने पत्थर की सफ़ेद गुफाएं (Night stay at Rangat and Lime Stone Caves of Baratang)
पोर्ट ब्लेयर से अधिकतर फेरियां नील होते हुए ही हेवलॉक जाती हैं, कुछेक को छोड़कर। कल कोस्टल क्रूज की जिस फेरी से मैं सुबह नौ बजे नील आया था, आज भी उसी फेरी से हेवलॉक जाना था। नील द्वीप की जेट्टी पोर्ट ब्लेयर जितनी बड़ी भी नही है और सुरक्षा जांच भी फटाफट हो जाती है। अगर आप नक़्शे तो पाएंगे की नील और हेवलॉक द्वीप बिलकुल सटे हुए हैं, और न्यूनतम दूरी एक किमी भी नहीं है, फिर भी आखिर नील से हेवलॉक जाने में एक घण्टे से भी अधिक का वक़्त क्यों लगता है? क्योंकि जहाँ से नील-हेवलॉक की न्यूनतम दूरी दिख रही है, वो हेवलॉक का सिर्फ दक्षिणी छोर है, जबकि हेवलॉक नील की तुलना में काफी बड़ा है और हमें हेवलॉक के उत्तरी छोर पर जाना है- जो हेवलॉक का मुख्य केंद्र है। नील से हेवलॉक के सफर में पूरे रास्ते भर हमें हेवलॉक का एक चक्कर काटना पड़ता है।
हेवलॉक के अंडमान पर्यटन का मुख्य केंद्र होने के कारण जेट्टी पर जबरदस्त भीड़-भाड़ थी। जहाज से बाहर निकलने में ही पंद्रह-बीस मिनट का वक़्त लगा क्योंकि यहाँ जहाज खाली होने वाला था, जबकि नील में सारे लोग उतरते नहीं, इसलिए वहां भीड़ कम थी। हेवलॉक जेट्टी के पास गोविंदनगर तट है, और यहाँ तटों के को उनके नंबर से जाना जाता है जैसे एक नंबर तट, दो नंबर तट आदि-आदि। जेट्टी से राधानगर तट दस किलोमीटर दूर है, जो विश्व प्रसिद्द तट है, और जाने के लिए हर पैतालीस मिनट में बस की सुविधा उपलब्ध है, कुछ ऐसी बस भी उपलब्ध हैं जिनका किराया 45 रूपये है, जबकि सामान्य बस का किराया सिर्फ दस रूपये ही है। हैवलॉक में होटलों के किराये काफी अधिक होते हैं इसलिए अग्रिम बुकिंग काफी जरुरी है। कुछ पर्यटक हेवलॉक में रात्रि प्रवास नहीं करते और उसी दिन वापस पोर्ट ब्लेयर लौट जाते हैं, किन्तु मेरे ख्याल से हेवलॉक में कम से कम एक दिन जरूर रुकना ही चाहिए।
हेवलॉक जेट्टी के पास सिर्फ बस स्टैंड ही है पर बाजार तीन किमी दूर है जिसे यहाँ तीन नंबर तट के नाम से पुकारा जाता है, मेरा होटल वी -नॉट भी वहीँ था। जेट्टी से राधानगर जाने वाली यही हेवलॉक की सबसे मुख्य और व्यस्त सड़क है जो बाजार से होकर ही गुजरती है। जिस वक़्त मैं जहाज से जेट्टी पर उतरा, दूर से ही एक बस जाती हुई दिखी, पर उसे पकड़ नहीं पाया। अगली बस पैतालीस मिनट बाद थी, इसलिए एक स्कूटी वाले से लिफ्ट ले ली, उसने बताया की वो एक टूरिस्ट गाइड है।
तीन नंबर इलाके में पहुँचने के मैं अपने होटल को ढूंढने लगा। इधर-उधर पूछने पर पता चला की होटल वाले ने कहीं कोई बोर्ड ही नहीं लगाया है। गर्मी हेवलॉक में भी काफी थी, फिर भी पर्यटक खूब थे, पूरा होटल हॉउसफुल चल रहा था, अगर पहले से बुकिंग न की होती तो बड़ी मुसीबत में पड़ सकता था। सबसे पहले मुझे राधानगर तट की ओर ही जाना था, और बसें होटल के सामने से ही गुजरती थी। ऑटो-टैक्सी वाले बाजार से राधानगर आने-जाने के हजार-बारह सौ से कम पर नहीं मानते। बाइक भी पांच-छह सौ रूपये पर किराये में मिल जाती है। पर जब दस रूपये में काम बन रहा हो, तो उतनी जद्दोजहद करने की क्या जरुरत?
होटल के सामने मुझे एक ढाबा दिखाई दिया। इस ढाबे को चलाने वाले झारखण्ड से ही यहाँ आये थे। अंडमान में पर्यटन से सम्बंधित कारोबार करने वाले अधिकतर व्यापारी-मजदूर इसी तरह मुख्य भूमि से ही आये हैं। हेवलॉक एक महँगी जगह है- खान-पान से लेकर सबकुछ, सिर्फ बसों के किराये छोड़ कर। एक मछली थाली की कीमत यहाँ डेढ़ सौ रूपये है और एक ज़ेरॉक्स पांच रूपये की।
कुछ देर बाद एक बस आयी, जिसमें अधिकतर लोकल ही चढ़े हुए थे, और वे राधानगर जा रहे थे, अपने-अपने दुकान लगाने के लिए- कोई निम्बू-पानी वाला, कोई खीरा बेचने वाला। बाकि हाई सोसाइटी वाले पर्यटक तो आराम से कारों से जा रहे थे, कुछ विदेशी बाइक-स्कूटी पर भी। हेवलॉक टापू के पूरे बीचो-बीच होकर यह सड़क जाती है, और रास्ते भर आपको प्रकृति का आनंद मिलता रहेगा, दोनों तरफ से हरियाली। बस एक चीज जो बुरी लगी- सड़क की गुणवत्ता। इतने बड़े पर्यटन केंद्र पर जहाँ पूरी दुनिया से लोग आते है, आज तक वही पुरानी सड़क चल रही है, देखकर लगता है की दस-बीस सालों से कोई मरम्मत का काम नहीं किया गया है। वैसे चौड़ीकरण का काम अभी कुछ दिनों पहले ही शुरू किया गया है।
राधानगर बस स्टैंड पर बस रुकी। यहाँ से तट तक पैदल रास्ता है, दोनों तरफ से दुकानें और ढाबे हैं, खाने-पीने की समस्या नहीं। एक बड़े से लकड़ी के तोरण द्वार पर वेलकम टू राधानगर बीच लिखा है। हालाँकि सबसे अच्छी बात यह है की यह इलाका पूरी तरह से प्लास्टिक निषेध इलाका है, यही नहीं, बल्कि पूरा अंडमान। तट के किनारे बैठने की कुर्सियां भी लकड़ी के बड़े-बड़े लट्ठों को काटकर बनायीं गयी है। छतरियां भी घास-फूस की बनी हैं। बहुत सारे तटों पर बैठने के भी पैसे लिए जाते हैं, पर अंडमान में हर जगह बैठना बिल्कुल फ्री है। ऊँचे-ऊँचे पेड़ों के छाँव तले यह जगह एकदम जन्नत से कम नहीं। यहाँ बैठकर नीले हरे तट का दीदार करते घंटों बिताया जा सकता है। इस तट पर किसी भी तरह का वाटर स्पोर्टस भी नहीं होता।
पर सिर्फ यहाँ बैठकर मन नहीं मानेगा ! तट को करीब से देखने, उसमें डुबकी लगाने की भी तीव्र इच्छा होगी ही। तट के करीब जाने पर इसकी सुंदरता देख कर आँखें तो सचमुच फटी की फटी रह गयीं! पानी में छलकते हुए अनगिनत रंग, सीधा-सपाट तट, सफ़ेद चांदी जैसा बालू। ऐसा समुद्र तट भारत में कहीं और नहीं है, और एक बार इसे देखने के बाद कोई और तट आपको बिलकुल अच्छा नहीं लग सकता। चाहे तट पर आप घंटों टहलते रहें या पानी में डुबकियां लगाते रहें, वक़्त का गुजरना महसूस नहीं होता, चाहे कड़ी धूप ही क्यों न हो! यही कारण है की एक बार वर्ष 2004 में टाइम मैगज़ीन ने इसे एशिया का सर्वाधिक सुन्दर तट करार दिया, और अब भी यह दुनिया के दस सबसे सुन्दर तटों में शुमार है।
राधानगर पर दो-तीन घंटे का पता नहीं चला, लेकिन कुछ और तटों को भी देखना था। दोपहर के दो बज रहे थे, सोचा की बाकि जगह आज शाम देख लेता हूँ, कल सुबह दुबारा राधानगर ही आऊंगा और फेरी तो कल शाम की है, यानी हेवलॉक में मेरे पास चौबीस घंटे से भी ज्यादा हैं। राधानगर वाली मुख्य सड़क किनारे से ही एलिफैंट तट जाने के लिए दो किलोमीटर का पैदल मार्ग है। वापसी की बस पकड़ पांच मिनट में यहाँ आ गया। यहाँ से मैंने दायीं ओर की पगडण्डी पकड़ ली हड़बड़ी में, एक गांव आ गया, स्थानीय लोगों ने कहा की अरे एलिफैंट बीच जाने का रास्ता यह नहीं, बल्कि दाहिने वाला पगडण्डी है। फिर से आधा किमी वापस आया और सही राह पकड़ी।
एलिफैंट तट जाने के रास्ते में घने जंगल है, और जमीन पर हाथियों के पैरों के निशान भी। तो क्या इस जंगल में हाथी भी रहते हैं? यह संदेह अकेले चलने में जरा भय भी पैदा कर रहा था। वापस आते लोग कहते की बस और थोड़ी दूर, और थोड़ी दूर बाद ही तट आ जायेगा। कुछ लोगों को यह तट एकदम बेकार लगा और मुझे कहा की राधानगर से आने के बाद तो आपको और भी बेकार ही लगेगा। दो किमी का यह ट्रैक किसी तरह खत्म हुआ और फिर सूखे झाड़ियों वाले पेड़ दिखे। जमीन पर असंख्य रेंगने वाले जीव जैसे घोंघे आदि विचर रहे थे। कहीं ये सूखे पेड़ सुनामी से उखाड़े गए पेड़ ही न हों!
सचमुच यह तट कुछ ख़ास नहीं था, और किसी सामान्य समुद्र तट जैसा था। सिर्फ वाटर स्पोर्ट्स वाले यहाँ थे। एक छोटा सा चक्कर लगा मैं वापसी करने लगा। वापसी में इस ट्रैक का कुछ पता न चला और बीस-पच्चीस मिनटों में ही फिर से मुख्य सड़क पर आ चुका।
बस पकड़ फिर से हेवलॉक के मुख्य बाजार आया। यहाँ अब नंबर वाले तटों को देखना शुरू किया। सबसे पहले गोविंदनगर के तीन नंबर तट पर गया। लेकिन राधानगर तट पहले ही देख लेने के कारण ये तट अधिक रास नहीं आये। सिर्फ मैन्ग्रोव के पेड़ करीब से देखे जा सकते थे। हेवलॉक में एक काला पत्थर तट भी है, पर दूर भी, उसे मैंने छोड़ दिया।
शाम हुई, हैवलॉक का बाजार जगमगाने लगा। यह बाजार नील द्वीप के बाजार से काफी बड़ा था, सभी तरह की चीजें यहाँ उपलब्ध थी जो एक बड़े शहर के बाजार में होती हैं। पूरे अंडमान में जिस चीज़ ने हर जगह निराश किया वो थी- मोबाइल पर नेट का न चलना।
अगले दिन पोर्ट ब्लेयर वापस जाने के लिए फेरी का समय शाम के पौने चार बजे था, इसलिए एक बार फिर से मैंने राधानगर में ही आधा दिन यूँ ही गुजार दिया। इस बार हेवलॉक से पोर्ट ब्लेयर वाली फेरी मैक्रूज की थी, जो पचास किमी की दूरी सिर्फ दो घंटे में तय करती है, नील में बिन रुके। अन्य फेरियां इससे अधिक समय लेती है, सरकारी फेरियां तो तीन-चार घंटे भी ले सकती हैं। मैक्रूज का सफर काफी आरामदायक रहा और तय समय से कुछ मिनट पहले ही हम पोर्ट ब्लेयर पहुँच गए।

हेवलॉक में आपका स्वागत है!
















































हेवलॉक के कुछ विडियो:
***अंडमान के अन्य पोस्ट***