कभी-कभी लगता है कि भटक लिया जाए, उन जगहों पर। जिसके बारे में हम कम जानते हैं, जहाँ के रास्तों के बारे में हमें नहीं पता और जहाँ की गलियां हमें नहीं पहचानतीं। क्या आपको नहीं लगता कि इस प्रकार का भटकना बेहद खूबसूरत होगा? भटकने के बाद जब वापस आप सही रास्ते पर आएँगे तो आपको बेहद खुशी होगी। अगर आपको ऋषिकेश में भटकने का मन हो तो आपको ऋषिकेश का कुंजापुरी ट्रेक करना चाहिए।
कुंजापुरी ट्रेक के बारे में सुना है? अक्सर लोग ऋषिकेश जाते हैं और वे राम झूला, लक्ष्मण झूला और गंगा ही देख पाते हैं। बहुत कम लोगों को पता है कि ऋषिकेश में एक खूबसूरत ट्रेक भी है। अगर आपको ऋषिकेश में उगते सूरज का सबसे खूबसूरत नजारा देखना चाहते हैं तो ऋषिकेश में कुंजापुरी से खूबसूरत जगह कोई नहीं है।
कुंजापुरी ट्रेक ऋषिकेश से कुछ किलोमीटर दूर से शुरू होता है। ये ट्रेक कुंजापुरी मंदिर के नाम पर पड़ा। ये मंदिर ऋषिकेश की सबसे ऊँची पहाड़ी पर स्थित है। यहाँ से आपको स्वर्ग रोहिणी, गंगोत्री, बांदेरपूंछ और चौखंभा की बर्फ से ढंकी चोटियाँ दिखाई देंगी। समुद्र तल से 1,645 मीटर की ऊँचाई पर स्थित कुंजापुरी मंदिर टिहरी गढ़वाल जिले में आता है। ये मंदिर आस्था के केन्द्र से भी बहुत महत्वपूर्ण है। देश के 52 शक्तिपीठों में से एक कुंजापुरी मंदिर है। कहा जाता है कि जलने के बाद जब भगवान शिव सती का शरीर ले जा रहे थे तो उनके शरीर के 52 टुकड़े अलग-अलग जगह गिरे थे। जहाँ बाद में शक्तिपीठ बना दिए गए। उन्हीं में से एक शक्तिपीठ कुंजापुरी है।
अगर आपका ऋषिकेश में एडवेंचर करने का मन हो, अगर आप ट्रेक की शुरूआत करना चाहते हैं, अगर आप ऋषिकेश की सबसे खूबसूरत जगह से सूर्यादय देखना चाहते हैं और अगर आप ऋषिकेश के गाँवों को देखना चाहते हैं तो आपको एक दिन का कुंजापुरी ट्रेक जरूर करना चाहिए।
कैसे जाएँ?
कुंजापुरी ट्रेक करने के दो रास्ते हैं। पहला कि आप ऋषिकेश के 4 किमी. आगे नीरगड्डु वाटरफाॅल जहाँ और उसी रास्ते से लगभग 20 किमी. की पैदल चढ़ाई करके कुंजापुरी पहुँचे। इस ट्रेक का दूसरा रास्ता है कि आप गाड़ी बुक करके या बस से हिंडोलाखाल गाँव पहुँचे। गंगोत्री जाने वाली बसें हिंडोलाखाल होकर जाती हैं। वहाँ पहुँचकर आप पहले कुछ घंटों में कुंजापुरी मंदिर पहुँचे और फिर नीचे की तरफ चलकर नीरगड्डु वाटरफाॅल होते हुए ऋषिकेश पहुँचे। वैसे तो दोनों रूट एक ही हैं लेकिन मेरे ख्याल से ट्रेक करने दूसरा तरीका आपके लिए अच्छा रहेगा।
ट्रेक में क्या-क्या?
हिंडोलाखाल से कुंजापुरी
1- पहाड़ और जंगल
जब आप हिंडोलाखाल से कुंजापुरी की तरफ जाएँगे तो आप बीच जंगलों से होकर गुजरेंगे। इस गाँव से कुंजापुरी मंदिर की दूरी लगभग 7 किमी. है। थोड़ी दूर बाद जब आप थोड़ी ऊँचाई पर पहुँच जाओगे तो आपको रास्ते छोटे लगने लगेंगे। पहाड़ में आपका कद बढ़ाता जाता है इसलिए तो हर किसी को पहाड़ पसंद होते हैं। रास्ते में कई प्रकार के फूल, फल और पेड़ मिलते हैं। अगर आप पहाड़ के हैं तो उनको पहचान भी सकते हैं। कुल मिलाकर पूरा रास्ता पहाड़ और जंगलों से भरा हुआ है जो आपका दिल खुश कर देंगे।
2- कुंजापुरी से नजारा
लगभग 7 किमी. की चढ़ाई के बाद आप मंदिर पहुँचेंगे। यहाँ से आपको दूर-दूर तक सिर्फ हरे-भरे पहाड़ ही दिखाई देंगे। अगर आप यहाँ सूरज निकलने से पहले पहुँचते हैं तो इससे खूबसूरत आपके लिए कुछ नहीं होगा। पहाड़ की चोटियों के पार से जब सूरज की लालिमा चारों तरफ फैलेगी। यकीन मानिए वो पल आपके लिए सबसे खूबसूरत होगा। अगर आप सूरज निकलने के बाद यहाँ पहुँचते हैं। तब भी यहाँ से नजारा बेहद खूबसूरत दिखाई देगा। यहाँ से आपको गंगा हरी दिखाई देगी। थोड़ी देर ठहरकर आपको आगे बढ़ना चाहिए।
कुंजापुरी से नीरगड्डु वाटरफाॅल
3- लंबे रास्ते
जब आप कुंजापुरी से नीरगड्डु वाटरफाॅल की तरफ चलेंगे तो पहले आपको पहाड़ से उतरना होगा। उसके बाद जंगलों से और फिर आप लंबे-लंबे रास्तों में पहुँच जाएँगे। जहाँ कई बार आपको बहुत लोग मिलेंगे और कई बार कोई नहीं। ये लंबे रास्ते आपको थका भी सकते हैं। इसलिए रूक रूककर रास्ता तय कीजिए। सबसे बड़ी ये लंबे रास्ते आपकी मंजिल को भटका सकते हैं इसलिए लोगों से मंजिल के बारे में पूछते जाइए। 27 किमी. का ये रास्ता इतना भी आसान नहीं है।
4- गाँवों वाला ट्रेक
मेरे ख्याल से वो ट्रेक सबसे खूबसूरत होता है जब आपको रास्तों में स्थानीय लोग भी मिलें। वो सिर्फ होटल और रेस्टोरेंट के रूप में न हो। जब आप ऐसे गाँवों से होकर ट्रेक करते हैं तो वो ट्रेक आपको हमेशा याद रहता है। आप उनसे कुछ देर ठहरकर बात कर सकते हैं, आप उनसे हेल्प भी ले सकते हैं। अगर आपको पानी या भूख लगी तो यकीन मानिए गाँव वाले मना नहीं करेंगे। इस ट्रेक में आपको धारकोट, दंगूल, अखोड़ और नीरगुड्डी गाँव मिलेंगे। ये सफर लंबा जरूर है लेकिन ये गाँव इसको और सुहावना बना देते हैं।
5- नीरगड्डु वाटरफाॅल
जब आप 20 किमी. चलने के बाद नीरगड्डु वाटरफाॅल पहुँचेंगे तो ये नजारा आपका मन मोह लेगा। आपको यहाँ चारों तरफ ठंडक ही ठंडक महसूस होगी। आप इस झरने में नहा भी सकते हैं या फिर पानी में पैर डालकर बैठ सकते हैं। जो आपको बेहद सुकून देगा। वाटरफाॅल के पास एक मैगी प्वाइंट भी है जहाँ से आप मैगी का मजा ले सकते हैं। यहाँ आपको कुछ देर बैठकर लंबे सफर की थकान दूर करनी चाहिए और इस खूबसूरत जगह का आनंद लेना चाहिए।
नीरगड्डु से ऋषिकेश
नीरगड्डु से ऋषिकेश की दूरी लगभग 5-6 किमी. होगी। आप झरने से नीचे उतरेंगे तो आपके साथ झरना भी नीचे उतरता है। पूरे रास्ते में अब आपको पहले सीढ़ियाँ मिलेंगी और फिर रास्ता। थोड़ी देर के बाद ही आप हाइवे पर पहुँच जाएंगे। आप फिर से वही शोर शराबे वाली जिंदगी में घुल जाएँगे। लेकिन जिस तरह आपने ये दिन बिताया है वो आपके जेहन में हमेशा बना रहेगा। इसलिए ऋषिकेश आएँ तो कुंजापुरी ट्रेक को करना न भूलें।
सावधानियाँ
1- कुंजापुरी ट्रेक लंबा है इसलिए आपको अपने साथ पीने के पानी रखना चाहिए। रास्ते में बहुत कम जगहों पर पानी मिलेगा, इसलिए जहाँ पानी दिखे भर लें।
2- इस ट्रेक को पूरा करने में एक दिन तो लगता ही है। इसलिए ट्रेक में थकान भी होगी। ऐसे में आपको एनर्जी की जरूरत पड़ेगी। आप अपने साथ कुछ खाने को रखे जो आप चलते-चलते खा सकते हैं।
3- रास्ता लंबा और खूबसूरत है लेकिन आपको समय भी ध्यान रखना है। आपको किसी भी हालत में अंधेरा होने से पहले ऋषिकेश पहुँच जाना है क्योंकि अंधेरे में जंगलों से होकर जाना खतरा भी है और मुश्किल भी है।
कब जाएँ?
वैसे तो इस ट्रेक को आप कभी भी कर सकते हैं लेकिन अगर आप कुंजापुरी से खूबसूरत पहाड़ियों और दूर तलक हरे-भरे पहाड़ देखना चाहते हैं तो आपको अप्रैल से अक्टूबर में इस ट्रेक को करना चाहिए। उसके अलावा बाकी समय में आपको यहाँ से बहुत कम बार साफ-साफ नजारा दिखाई देगा। इसलिए खूबसूरत नजारे को देखने के लिए अप्रैल से अक्टूबर का समय ही बेस्ट है।
कैसे पहुँचे?
रूट के बारे में आपको उपर ही जानकारी दे दी है। बाकी ऋषिकेश आप ट्रेन, फ्लाइट और बस किसी से भी आ सकते हैं।
ट्रेनः अगर आप ट्रेन से ऋषिकेश आना चाहते हैं तो सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन हरिद्वार है। जो ऋषिकेश से लगभग 25 किमी. की दूरी पर है। आप हरिद्वार से ऋषिकेश ऑटो या बस से आ सकते हैं।
फ्लाइट सेः अगर आप ऋषिकेश फ्लाइट से आना चाहते हैं तो सबसे नजदीकी एयरपोर्ट जाॅली ग्रांट एयरपोर्ट है। जहाँ से ऋषिकेश की दूरी 35 किमी. है। एयरपोर्ट से आप ऋषिकेश से टैक्सी बुक करके आ सकते हैं।
बस सेः अगर आप सड़क मार्ग से आना चाहते हैं तो आप दिल्ली से मुजफ्फरनगर, मेरठ, रूड़की, हरिद्वार होते हुए ऋषिकेश पहुँच सकते हैं। दिल्ली से ऋषिकेश के लिए बस चलती ही रहती हैं। इसलिए आपको यहाँ पहुँचने में कोई दिक्क्त नहीं होगी।
क्या आपने कभी कुंजापुरी ट्रेक किया है? अपने सफर का अनुभव यहाँ लिखें।
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