दिन 6 -7
२00 रुपये की आग और दोस्त का जन्मदिन।
दिन ५ बजे ही खत्म हो गया था। अब ठंड और ओस पड़ ने लगीं थी। कल सुप्रिया का जन्मदिन था। लेकिन हमे आज के रात ही सेलिब्रेशन करना था। हम सारी व्यवस्था कर कें आए थे। अब मैं बस 12 बजे तक नदी किनारे बैठना चाहते थे। लेकिन ठंड में ऐसा कैसे होगा। वैसे तो बोन फायर होने वाला था। लेकिन कारोना के कारण एक नया नियम बना दिया था। समूह द्वारा आग के पास न बैठें। इसलिए कोरोना द्वारा एक और व्यवसाय बनाया गया था। हमें अपनी लकड़ी खरीदनी थी और आग जलानी थी । अपने जीवन में पहली बार लकड़ी खरीदकर आग लगाई थी। लेकिन इतनी लकड़ी १२ बजे तक हमे पर्याप्त होगी नहीं, इसलिए मेरे दोस्त और वहा आए कुछ दिल्ली वाले दोस्त लकड़ी ढूंढने चले गए। जंगल में लकड़ी खोजने और बहुत मज़ा आया। और इस तरह जन्मदिन मनाया। एक और यादगार दिन से ये दिन खत्म हुआ।
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सुप्रिया घाग मोर सचिन पाटिल





